कभी मैं ये सोचता हूँ कि लोग एक खुशी के लिए कितने गम उठाते हैं और कभी कभी वो खुशी भी नसीब नही होती। कोई बात नही शायद यही जिंदगी हैं । महान शायर 'गालिब' ने सही ही कहा है -
किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ,
किसी को जमी नहीं मिलती , तो किसी को आसमां नहीं मिलता।
मेरी ये पंक्तियाँ भी कुछ उसी खुशी का जिक्र करती हैं-
हर मिलन बस एहसासों का अन्तराल है,
जिसमें डूबते एहसासों को किनारा मिल जाए,
बस मोतियों और नगमों की बारिश हो ,
दिल कहे ये जिंदगी बस यहीं रुक जाए।